Friday, December 14, 2018

ग़लती

आज एक मिस्टेक हो गयी, वो तो चलो हर रोज़ होती होगीं  लेकिन आज वाली तो दिल को छू गयी,  आज भी हमेशा की तरह  ऑफिस को आ रहा था बिन कुछ खाये , तो  एक  क्रीमरोल्ल  पेस्ट्रीज बेचने वाली आदमी साइकिल पे जा रहा था , जैसे ही मैंने उससे देखा तो अपना साइकिल उस के  आगे रोक कर  पूछा क ''क्रीम  रोल है?''  उसने हाँ में इशारा किया  मैंने इशारा किया क खिला दो एक, मीठे का तो मैं बचपन से ही  शौक़ीन हूँ , तो वो भाईसाहब ने साइकिल रोका और अपना क्रीम रोल वाला डिब्बा खोला और एक मस्त सा क्रीम से लबा लब रोल मेरे हाथ में थमा दिया , मैंने  दस रुपये का नोट  उसके हाथ में थमाया और उसने  पांच रुपये मुझे वापिस कर दिए और मैं बहुत खुश क भाई कौनसे ज़माने का ये इंसान है  जो पांच रुपये का क्रीम से लबा लब रोल दे है , चलो अपने को क्या है, मैंने पांच रुपये जेब में डाले और सामने देखा इक इंसान पेड़ के  नीचे बैठा बड़े गौर से मुझे क्रीम रोल खरीदते  देख रहा था , कपड़ो  से क्या वो निगाहों से  ही साफ़ ज़ाहिर कर रहा था के वो भूखा  है , जाने क्या हुआ मुझे मैंने उसको पूछा ''हाँ?'' मतलब मैंने कोशिश  तो यही की, उसको पुछु अगर उसको  भी खाना  हो तो , वो  सिर्फ देखता रहा , बोला  कुछ नहीं    मैंने सोचा  ठीक है, नहीं तो न सही , मत खाओ , साइकिल के पेंडल पर पाँव रखा  और चल दिया , लेकिन वो सिर्फ देखता रहा मेरी तरफ़ , जैसे उसकी निगाहें साफ़ साफ़ कह रही हों मुझसे , भाई दे दो कुछ खाने को , लेकिन मै ठहरा खुदगर्ज़ इंसान , कहाँ इतना सोचता हूँ किसी क वास्ते , चल दिया 



क्या हो गया यार आज मुझसे , आज तो पैसे भी थे , मैं क्यों न चला गया उस आदमी क पास खुद उससे क्रीम रोल देने , जल्दबाज़ी से फैसला ले लिया , साइकिल चलाते चलाते एक मिनट  बाद आया ये ख्याल, रास्ते में पीछे मुड़  के  भी देखा , लेकिन क्या  फायदा अब 

आ गया फिर  ऑफिस  यही सोचते सोचते क मिस्टेक हो गया आज  

बायोडाटा

नमस्कार स्वागत है आपका मेरे ब्लॉग पर, लिखने का शौक़ था इस लिए सोचा था ब्लॉग बनाया जाए , वैसे ज़्यादा मज़ा कागज़ और कलम पे लिखने का  है लेकिन  थोड़ा  सा सोशल होना भी ज़रूरी है , इस लिए आज दिसंबर के महीने में  १५ तारिख को शुरू किया ये मेरा ब्लॉग, अब ज़्यादा भूमिका न लिखते हुए कुछ अच्छा  सा 
लिखा जाए 

थोड़ा सा अपने बारे में ज्ञान दे दूँ , रूह  से कलाकार हूँ और पेशे से बेरोज़गार  , पिछले २२ सालों से बच्चा  ही हूँ , कोशिश अभी तक कर  रहा हूँ बड़ा बन ने  की लेकिन नहीं बना जाता , शायरी का शौक़ है, उर्दू और हिंदी  से इश्क़ है, और पंजाबी तो दिल में है, हूँ में पंजाब से

इतना बहुत है अपने बारे में,लेकिन जैसे  जैसे आप मेरा  ब्लॉग  पढ़ते जाएंगे तो  और ज़्यादा जानते जाएंगे मेरे बारे में , अभिनेता हूँ और नाम है अभिषेक, अभिनय का अभिषेक पिछले  १२ सालों से ही लग भग हो चूका है, बचपन में मोहल्ले वाले मंदिर में रामलीला में छोटे छोटे किरदार निभाता था , जैसे राम की सेना में या रावण की सेना में और  मज़ा  आता था  सारी सारी  रात घर से बहार रहना और  अजीब अजीब से कपडे पहन  कर अभिनय को निभाना , फिर एक वक़्त ऐसा भी आया जब इसी से   पैसे भी  मिलने  शुरू  हो   गए , लेकिन ख़ुशी कौनसी  हमेशा रहती है, चोलो छोडो , जाने दो 



ग़लती

आज एक मिस्टेक हो गयी, वो तो चलो हर रोज़ होती होगीं  लेकिन आज वाली तो दिल को छू गयी,  आज भी हमेशा की तरह  ऑफिस को आ रहा था बिन कुछ खाये , तो...